Aarti · हिंदी पाठ
रामदेव जी आरती
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पूरा पाठ
॥ श्री रामदेव बाबा की आरती ॥
पिछम धरा सूं म्हारा पीर जी पधारिया, घर अजमल अवतार लियो।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती, हरजी भाटी चंवर ढुले।
वैकुंठ में रामा होवे हर की आरती ॥
गंगा रे जमुना बेवे रे सरस्वती, रामदेव बाबो स्नान करे।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
केसर कुंकू रा भर्या रे चोपड़ा, रामदेव बाबो तिलक करे।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
वीणा रे तंदूरा धनी रे नौपत बाजे, झालर री झनकार पडे।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
घीरत मिठाई थारे चढे रे चूरमो, धूपा री महकार पडे।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
दूरा रा देशा रा बाबा, आवे थारे यात्री, दरगाह आगे नमन करें।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
खम्मा म्हारा बापजी ने, सारो जुग ध्यावे, अजमलजी रा कंवरा रो, भेद नही पावे।
द्वारका रा नाथ थाने, सारो जुग ध्यावे, जैसी ज्यारी भावना, वैसो फल पावे।
आंधलिया ने आँख्या देवे, पांगला ने पांव-पांव,
बाबा बांझडीया रा पालनिया, झुलावे जीओ।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
छोटा मोटा टाबरिया तो, पीरजी पुकारिया, बडोडा तो रामदेव केवे जीवो।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
ओर तो देवारा बाबा, देवल्या पुजीजे, म्हारा बाप जी रा पगल्या पुजीजे जीवो।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
मारवाड ध्यावे ज्याने, गोडवाड ध्यावे, सारी रे गुजराथ खम्मा गावे जीवो।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
हरि शरणा में भाटी, हरजी रे बोलिया, नवा रे खण्डा में निशाम धूरे।
लाछांबाई, सुगणाबाई करे हर की आरती ॥
पाठ का संदर्भ
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